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बेटियां आँगन की महक होती हैं

बेटियां चौंतरे की चहक होती हैं


बेटियां सलीका होती हैं

बेटियां शऊर होती हैं


बेटियों की नज़र उतारनी चाहिए

क्योंकि बेटियां नज़र का नूर होती हैं

इसीलिए

बेटी जब दूर होती हैं बाप से

तो मन भर जाता संताप से


डोली जब उठती है बेटी की

तो पत्थरदिलों के दिल भी टूट जाते हैं


जो कभी नहीं रोता

उसके भी आँसू छूट जाते हैं


बेटियां ख़ुशबू से भरपूर होती हैं
उड़ जाती हैं तब भी सुगन्ध नहीं जाती

क्योंकि बेटियां कपूर होती हैं


बेटी घर की लाज है

बेटी से घर है समाज है

बेटी दो दो आँगन बुहारती है

बेटियां दो दो घर संवारती हैं


बेटी माँ बाप की साँसों का सतत स्पन्दन है

बेटी सेवा की रोली और मर्यादा का चन्दन है

बेटी माँ का दिल है, बाप के दिल की धड़कन है



बेटी लाडली होती है सब की

बेटियां सौगात होती है रब की


बेटे ब्याह होने तक बेटे रहते हैं

लेकिन बेटी आजीवन बेटी रहती हैं


बेटियों की गरिमा पहचानता हूँ

बेटियों का समर्पण मैं जानता हूँ

इसलिए बेटी को मैं पराया नहीं

अपितु अपना मूलधन मानता हूँ


उस रात
चाँद नहीं निकला था
आकाश अँधेरे से
सरोबार था
पुरुष ने स्त्री को देखा
उसने उसकी देह की भाषा
पढ़ ली थी,
उसको बहलाया फुसलाया
उसके कसीदे में गीत लिखे
उस पर कविताएं लिखी
उसको आजादी का अर्थ बताया
तरक्की के गुण बताये
आखेट पर निकलने का शौक रखने
वाले की तरह
जगह जगह जाल बिछाया
नारी मुक्ति की बात कही
सपनों के स्वपनिल संसार का
झूठ बोला,

स्त्री ने प्यार भरी आँखों से
उसकी आँखों में झांका,
तीतर की तरह पंख फड़फड़ाता
पुरुष उसको
निरीह सा लगा
वह उसे देखकर मुस्कराई
और सपनो के सुनहरे संसार में
उड़ने लगी
आकाश की उत्कंठा में
लुका-छिपी का खेल देर-देर तक
चलता रहा
थके हुए क्षणों से
जिस चीज पर नारी नीचे गिरी
वह पुरुष का करीने से
बिछाया हुआ बिस्तर था.......


एक ही विकल्प भारत 
एक सर्वे के अनुसार तीन वर्ष का बच्चा जब टी.वी. देखना शुरू करता है और उस घर में केबल कनैक्शन पर 12-13 चैनल आती हों तो, हर रोज पाँच घंटे के हिसाब से बालक 20 वर्ष का हो तब तक इसकी आँखें 33000 हत्या और 72000 बार अश्लीलता और बलात्कार के दृश्य देख चुकी होंगी।यहाँ एक बात गंभीरता से विचार करने की है कि तो जो बालक 33 हजार बार हत्या और 72 हजार बार अश्लीलता का दृश्य देखेगा तो वह क्या बनेगा? आप भले झूठी आशा रखो कि आपका बच्चा इन्जीनियर बनेगा, वैज्ञानिक बनेगा, योग्य सज्जन बनेगा, महापुरूष बनेगा परन्तु इतनी बार अश्लीलता और इतनी हत्याएँ देखने वाला क्या बनेगा ? आप ही दुबारा विचार करे की कंही अधिक टीवी देखने के कारण आपके परिजन कंही अपराध और अनेतिक दुनिया में कदम तो नहीं रख रहे ?


तेग़-ओ-खंजर उठाने का वक़्त आ गया
लोहू अपना बहाने का वक़्त आ गया

सर झुकाते - झुकाते तो हद हो गयी
अब तो नज़रें मिलाने का वक़्त आ गया

ख़त्म दहशत पसन्दों को कर दें ज़रा
मुल्क़ में अम्न लाने का वक़्त आ गया

क़त्ल-ओ-गारत के साये हटाने चलें
अब तो मौसम सुहाने का वक़्त आ गया

क्यों अँधेरे में बैठे हो 'अलबेला' तुम ?
अब तो शमा जलाने का वक़्त आ गया

जय हिन्द !


मुझे किसी से कोई गिला ही नही,
वो मेरा था ही नहीं ,जो मुझे मिला ही नहीं
डरते थे कि कैसे जियेंगे उस से बिछड कर
पर अब तो यादों का सिलसिला भी नहीं 
मुझे तुझसे कोई शिकायत भी नहीं
जो समझ सके मुझको वो तू नहीं
शायद ऐसा कभी कोई मिला ही नहीं
फिर भी इस ज़माने से अकेले लड़ने का हौसला बाकि है मुझमे
तुम्हारे बाद कितने ही तूफां आये
पर मैं कभी हिला भी नहीं 


किसी मासूम को रेशम में लिपटा फेक आई है
कोई शहज़ादी एक नन्हा फ़रिश्ता फेक आई है ..........


यतीमों में इज़ाफा हो गया फुटपाथ पर फिर से 
अमीरी फिर कोई नापाक़ रिश्ता फेक आई है ................


उसी बुनियाद पर देखो अमीर ए शहर बसता है
गरीबी जिस जगह अपना पसीना फेक आई है ..........

वो पागल आँख में आंसू तो अपने साथ ले आई
मुहब्बत की निशानी था जो छल्ला,फेक आई है .............

ये मैं ही हूँ मुसलसल चल रहा हूँ नंगे पावों से
कि ये तक़दीर तो राहों में शीशा फेक आई है .....................


आज ४-फरवरी को चौरा चौरी काण्ड की बरसी है . चौरी चौरा उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास का एक कस्बा है जहाँ 4 फ़रवरी 1922 को भारतीयों ने बिट्रिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा दी थी , जिससे उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जल के मर गए थे। इस घटना को चौरीचौरा काण्ड के नाम से जाना जाता है।

भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में १३ अप्रैल १९१९ (बैसाखी के दिन) को रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल ओ. डायर नामक एक अँगरेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें १००० से अधिक व्यक्ति मरे और २००० से अधिक घायल हुए। इस नरसंहार के बाद सारे देश में अंग्रेजो के खिलाफ नफरत की भावना पैदा हो गयी थी .

इस घटना के बाद देश में अंग्रेजों के खिलाफ जन आक्रोश को देखते हुए , गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन शुरू किया था . गोरखपुर में आन्दोलन करने वालों पर पुलिस ने अँधा-धुंध गोली चला दी थी . जिसमे काफी लोग मारे गए थे, इस पर बहा के लोगों ने मिलकर पुलिस पर हमला बोल दिया और और अंग्रेज पुलिस वालों बहुत पीटा. कुछ तो इधर उधर भाग गए बाकी अंग्रेज पुलिस बाले , चौरा चौरा थाने में चुप कर जनता पर गोलियां चलाने लगे . इस पर आन्दोलन कारियों ने थाने में आग लगा दी जिसमे २२ पुलिस बाले मारे गए .

जालिम अंग्रेजों की हिम्मत जलियाँ बाले बाग़ काण्ड के बाद बहुत बढ़ चुकी थी, लेकिन इस घटना के बाद उनको भी हिन्दुस्तानियों से भय लगने लगा था . इस इस घटना के बाद अंग्रेजों को लगने लगा कि अब जनता पर जुल्म करना तो दूर अपनी जान बचाना भी मुस्किल है. इस लिए इस काण्ड के बाद १७७ लोगों को फांसी की सजा सुनायी गयी थी , मगर महामना मदन मोहन माल्वीय जी के प्रयास से 15८ लोगों की जान बच सकी थी . १९ लोगो को २-जुलाई १९२३ को फांसी पर लटका कर शहीद कर दिया गया था .

इसके अलावा अंग्रेजों ने मुसलमानों के लिए एक अलग मुस्लिम देश बनाने का लालच देकर, मुसलामानों को असहयोग आन्दोलन से अलग किया और फिर गांधी पर दबाब डालकर आन्दोलन बापस लेने पर मजबूर किया . गांधी ने कहा कि - हिंसा होने के कारण असहयोग आन्दोलन उपयुक्त नहीं रह गया है और उसे वापस ले लिया था . उसके बाद भारतीय क्रांतिकारियों का दमन करना शुरू कर दिया था .

२- जुलाई १९२३ को चौरी चौरा कांड के क्रांतिवीरो को, देश के विभिन्न जेलों में फासी पर लटका दिया गया . जिन १९ क्रांतिकारियों को फासी हुई थी उन शहीदों के नाम इस प्रकार हैं .--

१- अब्दुल्ला उर्फ़ सुकई
२-भगवान
३-विकरम
४-दुधई
५-कालीचरण
६-लाल्मुहमद
७-लौटू
८-महादेव
९-लालबिहारी
१०-नज़र अली
११-सीताराम
१२-श्यामसुंदर
१३-संपत रामपुरवाले
१४-सहदेव
१५- संपत चौरावाले
१६-रुदल
१७-रामरूप
१८-रघुबीर
१९- रामलगन

इन अमर शहीदों को मेरा कोटि कोटि नमन, भारत माता कि जय, वन्दे मातरम , जय हिंद .....