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एक दोस्त ने दूसरे को समझाया
‘‘यह ‘आई लव यू’ लिखकर
प्रेम पत्र भेजने से काम नहीं चलेगा,
इस तरह तो तू जिंदगी पर आहें भरेगा।
अपने पत्र में
तमाम तरह के तोहफों की पेशकश कर,
जज़्बातों से ज्यादा वादों के शब्द भर,
भले ही बाद में कार में न घुमाना
पहाड़ों पर हनीमून मनाने की बात भुलाना
मित्र, अब केवल दिल से दिल नहीं जीते जाते,
होटलों के बिल से ही इश्क के गीत लिखे जाते,
जो बताई मैंने तुझ राह
मंजिल तुझे तभी मिलेगी
जब आजकल के इश्क की राह चलेगा।’

कु. विजेंद्र शेखावत
ठि. सिंहासन


एक महात्मा रात-दिन एक जंगल में साधना करते रहते थे। एक दिन उस राज्य का राजा उस जंगल में कहीं से घूमता हुआ पहुंचा। एक निर्जन स्थान पर महात्मा जी को भक्ति में लीन देखकर वह सोचने लगा कि यह आखिर कैसे गर्मी, सर्दी, बरसात और हर तरह के कष्ट सहते हुए अपने लक्ष्य को साधने में लगे हुए हैं?

यह सोचकर उसने अपने मंत्री को आदेश दिया कि वह इस बात का पता लगाए कि सर्दी में महात्मा जी की रात कैसी बीतती है। मंत्री महात्मा जी के पास पहुंचा। उसने प्रश्न किया, ‘मुनिवर, मेरे महाराज जानना चाहते है कि इस सर्दी में आपकी रात कैसी गुजरती है?’

महात्मा बोले, ‘वत्स, मेरी रात तो कुछ आप जैसी ही कटती है पर दिन आपसे अच्छा गुजरता है।’ मंत्री ने राजा को यह बात बताई तो राजा अचरज में पड़ गया। उसने स्वयं महात्मा के पास जाने का निर्णय किया। उसने महात्मा के चरण स्पर्श करके निवेदन किया, ‘महात्मन, मैं इस राज्य का राजा हूं और आपसे यह जानना चाहता हूं कि सर्दी में आपकी रात कैसी गुजरती है?’

महात्मा ने मुस्कराकर कहा ,’मेरी रात कुछ आप जैसी ही गुजरती है पर दिन आप से अच्छा कटता है।’ राजा ने फिर पूछा, ‘मैं आपके इस रहस्यपूर्ण उत्तर को नहीं समझ पा रहा हूं। कृपया इसे स्पष्ट करें।’ महात्मा जी ने कहा ‘जब रात में मैं और आप गहन निद्रा में होते हैं तो वह रात आप जैसी ही बीतती है क्योंकि निद्रा देवी की गोद में सोए हुए हर मानव की स्थिति एक समान होती है। किंतु जब मैं और आप जागृत अवस्था में होते है, तब आप तो अपने बुरे-भले कामों में व्यस्त रहते है जबकि मैं उस समय भी परम पिता परमात्मा का श्रद्धापूर्वक स्मरण करता रहता हूं। इसलिए मेरा जागृत समय आपसे कहीं ज्यादा फलदायक होता है। इसी कारण मैंने कहा कि रात आप जैसी गुजरती है पर दिन आपसे अच्छा गुजरता है।’ यह सुनकर राजा उनके समक्ष नतमस्तक हो गया।

कु. विजेंद्र शेखावत
ठि. सिंहासन



    • अपने लिए नहीं मांगते सिंहासन
      दो पल की रोटी की खातिर
      मजदूर इधर से उधर जाते
      अपने पसीने की धारा में
      अपना पूरा जीवन गुजारते
      नहीं किसी का खून चूसने जाते
      नहीं करते चोरी
      न करते लूट
      इसलिए रोज चैन की नींद सो जाते

      जिनका जीवन बीतता है रोज
      छल कपट के साथ
      दौड़ते जाते माया के पीछे
      फिर भी नहीं आती वह हाथ
      दिन में चैन नहीं है
      रात को नींद नही
      वह गरीब मजदूर को नहीं सह पाते

      ऊंचे महलों में भी जिनको सुख नसीब नही
      थाली में सजे पकवान
      पर पेट में जाने का उनकों रास्ता नहीं
      मजदूर के तिनकों के घरोंदों को
      भी देखते तिरछी नजर से
      उसकी रोटी के सूखे टुकड़े को
      देख कर उनके पेट जलते
      क्योंकि सुख का मतलब वह नहीं समझ पाते

      शायद इसलिए जब भी
      होता है कहीं हंगामा
      मजदूर बनता है निशाना
      दुनिया के लोग भले ही अमीरों के
      स्वांग पर करते हैं नजर
      पर मजदूर के सच की अग्नि की
      आंच भी नहीं झेल पाते
      कोई नहीं होता हमदर्द पर फिर भी
      मजदूर जिए जाते
      यह जिन्दगी सर्वशक्तिमान की देन है
      यही सन्देश फैलाते जाते
      अमीरों के चौखट पर
      हाजिर करने वाले बहुत होते पर
      पर मजदूरों के पसीने के बिना
      कभी किसी के महल नहीं बन पाते


रामा-रामा कैसा ये गजब हो गया,
आजकल का रंग -ढंग कैसा अजब हो गया,,

जो वस्त्र होता था नीचा वो ऊँचा ,
और जो होना था ऊँचा वो नीचा हो गया,
...
जब तक ''जोकी'' लिखा न दिखे ,इनको आता चैन नहीं ,
अगर करे कोई टोका-टोकी होता इनको सहन नहीं,,
कन्यायें भी त्याग रही पहनावे के सरे संस्कार,
टॉप हो रहा ऊँचा -ऊँचा,भूल गयी सूट-सलवार,,

अब हम भी क्या कहें,कई माँ-बाप ही देते हैं उनका साथ,
फैशन करने में वो भी आगे हैं उनसे दो हाथ,,

माँ ये सोचे ,समझें सब उसको बेटी की बहन,
बाप को भी बेटी की सहेली का अंकल कहना नहीं सहन,,

हे मेरे मालिक तुमने ''अमित'' के साथ ये क्या गजब किया,,
क्या मैं इसके लायक था , जो मुझे ये सब देखने भेज दिया,,

मेरे भाइयो और बहनों न भूलो अपना सनातन इतिहास,
आधुनिक बनो पर ऐसे की कोई उड़ा न सके आपका उपहास,,


कुं अमित सिंह 


राजस्थान जूनो प्रदेश। जूनी मानतावां। जूनो इतिहास। जूनी भाषा। जूनी परापर। परापर एड़ी कै आज तक इकलग चालै। खावणै-पीवणै, उठणै-बैठणै अनै बोवार री आपरी रीत। रीत में ठरको। ठरकै में इतिहास री ओळ। ग्यान-विग्यान अर भूगोल री ओळ। बात-बोवार अर नांव में राजस्थानी री सौरम। इण सौरम रो जग हिमायती। आजादी सूं पैली राजस्थान में घणा ठिकाणा। घणा ई राज। राजपूतां रा राज। इणी पाण राजपूताना। राजा राज करता पण धरती प्रजा री। प्रजा राखती नांव धरती रा। नांवकरण में ध्यान धरती रै गुण रो। राजवंश, फसल, माटी, पाणी, फळ, पसु-पखेरू धरती रा धणी। आं री ओळ में थरपीजता इलाकै रा नांव।बीकानेर रा संस्थापक राव बीकाजी रै नांव माथै बीकाणो। बीकाणै में बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, भटिंडा, अबोहर, सिरसा अर हिसार। राव शेखाजी रै नांव माथै शेखावाटी। शेखावाटी में चूरू, सीकर अर झुंझुणू। मारवाड़ में जोधपुर, पाली जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर। मेवाड़ में उदयपुर, चितोड़ , भीलवाड़ा अर अजमेर। बागड़ में बांसवाड़ा अर डूंगरपुर। ढूंढाड़ में जयपुर, दौसा, टोंक, कीं सवाईमाधोपुर। हाड़ौती में कोटा, बूंदी, बांरा, झालावाड़, कीं सवाईमाधोपुर। मेवात में अलवर, भरतपुर। जैसलमेर में माड़धरा, हनुमानगढ़ नै भटनेर, करोली-धोलपुर नै डांग, अलवर नै मतस्य, जयपुर नै आमेर, अजमेर नै अजयमेरू, उदयपुर नै झीलां री नगरी, जैसलमेर नै स्वर्णनगर, जोधपुर नै जोधाणो अर सूर्यनगरी, भीलवाड़ा नै भीलनगरी, बीकानेर नै जांगळ अर बागड़ भी कैईजै। राजस्थान रै हर खेतर रा न्यारा-निरवाळा नांव। कीं नांव बिणज-बोपार माथै। कीं नांव जमीन री खासियतां रै पाण। बीकाणै में भंडाण, थळी, मगरो अर नाळी जे़डा नांव सुणीजै। ऐ हाल तो बूढै-बडेरां री जुबान माथै है। बतळ में उथळीजै। पण धीरै-धीरै बिसरीज रैया है। आओ आपां जाणां आं नांवां री मैमा।
भंडाण भंडाण बीकानेर जिलै री लूणकरणसर, बीकानेर अर कीं कोलायत तहसील रै उण गांवां नै कैवै जकां रै छेकड़ में 'ऐरा' लागै। जियां- हंसेरा, धीरेरा, दुलमेरा, खींयेरा, वाडेरा।भंडाण रा मतीरा नांमी होवै। मीठा। अठै री आल जबर मीठी होवै। आल लाम्बै मतीरै नै कैवै। भंडाण री गायां-भैंस्यां, भेड-बकरयां अर ऊंट नांमी। भंडाण रो घी, मावो अर मोठ नांमी। मतीरो भंडाण रो सै सूं सिरै। अठै रै मतीरै सारू कैबा है-
खुपरी जाणै खोपरा, बीज जाणै हीरा।बीकाणा थारै देस में, बड़ी चीज मतीरा।।थळीथळी चूरू जिलै रै रतनगढ़ अर सुजानगढ़ रै खेतर नै थळी कैवै। इण खेतर रा लोग थळिया। थळी री बाजरी, मोठ, काकड़िया, मतीरा नांमी हुवै। थळी री बाजरी न्हानी अर मीठी होवै। थळी रा वासी मोटो अनाज खावै। काम में चीढा अनै जुझारू अर तगड़ा जिमारा होवै। थळी सारू कैबा है-
खाणै में दळिया, मिनखां में थळिया।
मगरोबीकानेर जिलै री कोलायत तहसील अर इणरै लागता जैसलमेर रा कीं गांवां नै मगरो कैवै। अठै री जमीन कांकरा रळी। मगर दाईं समतळ। पधर। इण कारण नांव धरीज्यो मगरो। मगरै रा ऊंट, गा-भेड अर बकरी नांमी। कोलायत धाम भी मगरै में पड़ै।
नाळीहनुमानगढ़, सूरतगढ़, पीळीबंगा, अनूपगढ़, विजयनगर अर हरियाणा रै सिरसै जिलै रै गांवां नै नाळी कैवै। अठै बगण आळी वैदिक नदी सुरसती जकी नै अजकाळै घग्घर भी कैवै। इण नदी खेतर नै नाळी कैईजै। इण इलाकै रो नांव नाळी क्यूं थरपीज्यो। इण सूं जुड़ियोड़ी एक रोचक बात है। आओ बांचां-जद घग्घर में पाणी आंवतो। बीकानेर रा राजा नदी पूजण हनुमानगढ़ आंवता। एकर राजाजी हनुमानगढ़ आयोड़ा हा। लारै सूं एक जणो अरदास लेय'र महलां पूग्यो। राजाजी नीं मिल्या। पूछ्यो तो लोगां बतायो, नदी पूजण गया है। बण पूछ्यो, नदी के होवै? एक कारिंदै जमीन माथै माटी में घोचै सूं लीकटी बणाई। लोटै सूं उण में पाणी घाल्यो। बतायो, नदी इयां होवै। बण कैयो, ऐ डोफा! आ क्यांरी नदी ? आ तो नाळी है, नाळी। बस उण दिन रै बाद इण इलाकै रो नांव नाळी पड़ग्यो। नाळी रा चावळ, कणक अर चीणा जग में नांमी। नाळी री जमीन घणी उपजाऊ होवै।

कु. विजेंद्र शेखावत
ठि. सिंहासन


हम भूल चुके है हाँ

हम भूल चुके है जिस पीड़ा को उसको फ़िर उकसानी है |

केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||

ऋषि मुनियों की जन्म भूमि यह भारत इसका नाम

देवों की अवतार भूमि यह सतियों का प्रिय धाम

दूर देश से भिक्षुक आते थे विद्या के काम

इतिहास बताते हाँ ---

इतिहास बताते भारत के वेदों की अमर कहानी |

केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||

यवनों का अधिकार हुवा रिपुओं की सब कुछ बन आई

धर्म त्याग जो नही किया तो खाले उनकी खिचवाई

वेद जलाये देवालय तोडे मस्जिद वहां पे बनवाई

भारत का जर्रा हाँ ---

भारत का जर्रा -जर्रा कहता वीरों की नादानी |

केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||

नादिरशाही हुक्म चला था कट गए थे सिर लाखों

देश धर्म की बलिवेदी पर शीश चढ़े थे लाखों

दिल्ली के तख्त पलटते हमने देखे थे इन आंखों

नही सुनी तो हाँ --

नही सुनी तो फ़िर सुनले हम वीरों की कुर्बानी |

केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||

मुगलों ने जब किया धर्म के नाम अनर्थ अपार

चमक उठी लाखों बिजली सी राजपूती तलवार

और सुनो हल्दी घाटी में बही रक्त की धार

हर -हर की ध्वनी में हाँ--

हर-हर की ध्वनी में सुनते है वह हुँकार पुरानी |

केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||



काबुल को फतह किया पर नही मस्जिद तुडवाई

अत्याचारी गौरी की भी गर्दन कहाँ कटाई

अरे विदेशी शत्रु को भी हमने माना भाई

बुझते दीप शिखा की हाँ---

बुझते दीप शिखा की हमको फ़िर से ज्योति जगानी

केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||

याद हमें है दुर्गादास और वह सांगा रणधीर

याद हमें है सोमनाथ भी और बुंदेले वीर

याद हमें है हल्दी घाटी और हठी हमीर

याद हमें है हाँ--

याद हमें है रण में जूझी वह हाड़ी महारानी |

केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||



पति-पत्नी में छोटी-छोटी बातों को लेकर अक्सर नोक-झोंक होती रहती है। स्त्री-पुरूष के झगडे कभी कम नहीं होंगे। पुरूष महिलाओं को कोसते हैं और महिलाएं पुरूषों को। स्त्री का मानना है पुरूष स्वार्थी होता है। शादी करते समय पुरूष सोचता है स्त्री बदलेगी, स्त्री सोचती है कि वह पुरूष को बदल देगी और अंत में दोनों निराश रहते हैं। क्या-क्या शिकायतें होती हैं एक-दूसरे से इन्हें जानते हैं इनसे ही।

स्त्री पक्ष
1. महिलाओं को हमेशा शिकायत रहती है कि पुरूष देर से उठते हैं। जब ऑफिस जाने में थोडी देर रह जाती है और उठते ही बस अपने सामानों के बारे में पूछते रहते हैं कि मेरा पर्स कहां रखा है, रिस्ट वॉच कहां है आदि।

2. क्रिकेट के प्रति पुरूषों के प्रेम को लेकर भी महिलाएं ज्यादा परेशान रहती हैं।इनका टीवी और क्रिकेट पे्रम तलाक के कारण बन रहे हैं।

3. महिलाओं को अक्सर यह शिकायत रहती है कि उनके पति उनके घरवालों को महत्तव नहीं देते। साथ ही यह चाहते हैं कि उनकी पत्नी उनके माता-पिता का पूरा ध्यान रखे।
4. महिलाओं को यह भी शिकायत रहती है कि जब भी वे कोई सामान मंगाती है तो उनके पति अक्सर भूल जाते हैं।
5. पुरूषों का ऑफिस से लौटकर भी काम और मोबाइल में लगा रहना भी महिलाओं की एक शिकायत है।
6. महिलाएं जब पुरूषों को शापिंग के लिए कहती हैं तो उन्हें फिजूलखर्ची लगती है और खुद दोस्तो के साथ पार्टी करते रहते हैं।

7. महिलाएं अक्सर यह शिकायत करती है कि उनके पति शादी के बाद उनकी तारीफ करना कम कर देते हैं।

8. एक्जाम में बच्चों के नंबर कम आने पर पुरूष महिलाओं को ही कोसते हैं। खुद बच्चों की पढाई के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं लेते।

9. महिलाओं को यह भी शिकायत रहती है कि पुरूष अपनी चिजौं को यथास्थान नहीं रखते। वे अपनी चिजौं को यहां-वहां पटक देते हैं।

10. घर पर सुंदर पत्नी होने के बावजूद ये बाहर फलर्ट करने कभी बाज नहीं आते। कई बार तो पत्नियों के साथ होते हुए भी ये सामने वाली लडकी से फ्लर्ट करने से नहीं चूकते।
11. महत्तवपूर्ण तारीखें पुरूषों कों कभी याद नहीं रहतीं। पत्नियों का बर्थ डे और मैरिज एनिवर्सरी तो शायद ही इन्हें याद रहते हों।

12. पुरूषों के अहंकार से भी महिलाएं परेशान रहती हैं। महिलाओ को शिकायत रहती है कि पुरूषों को उन पर भरोसा नहीं होता। साथ ही पुरूष सोचते हैं कि इनके बिना महिलाएं आगे नहीं बढ सकती हैं।
13. पुरूष को महिलाओं की हर बात को काटने में मजा आता है। उस पर शिकायत यह कि तुम बोलती बहुत हो......।
14. पुरूषों के गुस्से से भी महिलाएं परेशान रहती हैं। महिलाओं का मानना है कि पुरूषों में धैर्य की कमी होती है।
15. महिलाओं को लगता है कि पुरूष बहुत स्वार्थी होते हैं।
पुरूषों की भी महिलाओं से कुछ शिकायतें रहती हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि पुरूषों को महिलाओं से क्या-क्या शिकायतें रहती हैं।
पुरूष पक्ष:
1. पुरूषों का मानना है कि महिलाएं कभी भी खुलकर नहीं बोलतीं। वे चाहती हैं कि पुरूष उनकी बातों को अपने आप ही समझ जाएं।
2. पुरूषों को यह भी शिकायत रहती है कि पत्नियां पैसों को लेकर उनसे अक्सर झगडती रहती है।
3. महिलाएं चाहती हैं कि पुरूष बेवजह भी उनकी तारीफ करते रहें। वजन चाहे दिन दुनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ रहा हो बेबो को देखकर पत्नियों को यही लगता है कि वे भी जीरो साइज की हो सकती हैं।
4. महिलाएं पुरूषों को बहुत इंतजार कराती है। यह भी पुरूषौं को शिकायत रहती है। कोई इंतजार करके मरता रहे इनकी बला से।
5. महिलाओं के मूड का कोई ठिकाना नहीं होता। कब कौन सी बात इनको चुभ जाए ये तो ब्रहा ही बता सकते हैं।
6. महिलाएं करती वहीं है जो वे चाहती है लेकिन हर फैसले पर पुरूषों की मुहर चाहती हैं ये। फिर हर बात पर पुरूषों से पूछती क्यौं हैं।
7. पुरूषों को शिकायत रहती है कि महिलाएं उनको पर्सनल स्पेस नहीं देती। हर बात पर सवाल और रोक-टोक करती हैं।
8. पुरषों का मानना है किमहिलाएं शॉपिंग मीनिया से ग्रस्त हैं। महिलाओं का एक शॉप पर घंटे भर खडे होकर पांच रूपये कम कराने के लिए दुकानदार से झिकझिक करना और फिर बिना कुछ लिए वहां से चल देना पुरूषों को अच्छा नहीं लगता।
9. महिलाएं चाहे कैसा ही खाना बनाएं पर ये उम्मीद रखती हैं कि इनके हुनर की तारीफ करें।
10. महिलाओं का अपने पति पर शक करना और जासूसी करना पुरूषों को बिल्कुल भी पसंद नहीं है। उन्हें हमेशा यही लगता है कि पुरूष इन्हे धोखा दे रहे हैं। उनकी आंखें किसी सी.बी.आई.इंस्पेक्टर की तरह हमेशा पुरूषों को टटोलती रहती हैं।
11. यदि महिलाओं को कोई बात मनवानी हो तो आंसू इनके बडे अस्त्र हैं । अपनी बात मनवानी हो तो सबसे पहले आंसू निकलते हैं और फिर शुरू होता है नाराजगी का दौर।
12. पुरूषों का मानना है कि महिलाएं तार्किक ढंग से नहीं सोचती। भावनाओं में बहना और गलती हो जाए तो इसका ठीकरा भी पुरूषों के सिर फोंडना इनकी पुरानी आदत है।
13. महिलाओं को हमेशा शिकायत रहती है कि पुरूष सभ्य नहीं होते लेकिन कभी इन सभ्य çस्त्रयों को लडते देखा है।
14. अपनी तबियत को लेकर सिर दर्द को लेकर अक्सर पतियों को टोकती हैं लेकिन डॉक्टर को नहीं दिखाती।
15. इतनी ड्रेसेज होने के बावजूद महिलाओं को लगता है कि उनके पपस कपडें कम हैं।
कु. विजेंद्र शेखावत
सिंहासन
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